wrote 1 month ago: **************************************** **************************************** तुम्हारा हा … more →
wrote 1 year ago: कई दिनोंसे ख्वाब ये देखा है मैंने खुदहीको तुम बनते देखा है मैंने इन आँखोंसे है देखा उन आँखोंमें उस म … more →
wrote 1 year ago: सुख-दुखमें संग दें नैना,जीवनको रंग दें नैना चेहेरेका गहना नैना, कहलायें चितवन नैना पहले होते भोले नै … more →
wrote 1 year ago: दहलीजपर मुझे देख असमंझसमें तुम अचंबित हो निहारती, बोलती है गुम चाहता हूँ अब हम रहें कुछ गुमसुम संदूक … more →
wrote 1 year ago: नहीं जानता मैं कि उस ओर क्या है यहाँसे जुदा वहाँ और क्या है जहाँ रोशनी है, वहाँ कुछ तो होगा, अनबनीमे … more →
wrote 1 year ago: जीवनमें कविता, हर रुपमें मिलती है कभी भावुकताकी छायामें, कभी दर्शनकी धूपमें खिलती है. कभी सहास्य सखी … more →
wrote 1 year ago: महिला दिवस क्या होता है ? हर जीवनका प्रथम दिवसही पहला महिला दिवस होता है उस दिनकी कोखसे ही तो रात-द … more →
wrote 1 year ago: जीवनका एक गहरासा अनुभव “मैंभी एक स्वतंत्र हूं जीव,” कहने लगा हो मुझसे विभक्त, “होन … more →
wrote 1 year ago: एक दिन सुबह तडके गया अपनी प्रतिभासे मिलने कहा उसे,’ बिजली ‘ पर मुझे कुछ शब्द हैं लिखने प … more →
wrote 1 year ago: कुछ इस कदर बढ चुकी है तनहाईयोंकी आबादी मुश्किल हो गया है पाना इनकी भीडसे आजादी भीड हुई तो क्या , तनह … more →
wrote 2 years ago: समयकी नदीके तटपर चिंतन कर , एकांतमें बैठकर कर रहा था प्रतीक्षा, नववर्षकी दहलीजपर. सहसा, कालके प्रवाह … more →
wrote 2 years ago: विश्व-निर्माणके पूर्व , था ब्रह्म एकल सम्पूर्ण सदैव सत-चित-आनंदमें स्थित परंतु स्वयमसे अपरिचित किसीभ … more →
wrote 2 years ago: आपके विषयमें नहीं जानता, पर मेरे पास हैं बहुतसे सालोंसे हूँ इन्हें पहनता ये हो गए हैं अब अपनेसे जबसे … more →
wrote 2 years ago: ( फिल्म ” कभी कभी ” की इस मूल रचनासे जुडी हम सभीकी भावनाओंकी क्षमा चाहता हूँ ! ) कल नया … more →
wrote 2 years ago: कोवळी सूर्यकिरणं लेवून पहाट तळ्यावर अलगद येते पाण्यात प्रतिबिंब पाहून स्वतःशीच मोहरते.. सोनेरी बटांन … more →