वाचून बघा wrote 10 months ago: दोतरफा सरहदपर क्या धूम मची है गश्तोंकी कहानियाँ यहाँ हमने खूब रची है रिश्तोंकी खोजती रही हो तुम आशिय … more →
वाचून बघा wrote 1 year ago: वो बैठे हैं रूबरू और शाम ढलने को है दरमियाँ का शीशा अब पिघलने को है छोड़ आया बीच मझधार यादों को तेरी … more →
वाचून बघा wrote 1 year ago: चलो रंगरेलिया मनाएं, कहां छिपी होली है बुरा नहीं मानेगी वह, भई आखिर होली है ! अनगिनत रंगों में तेरे … more →